
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे धनु संक्रांति कहा जाता है और इस समय से खरमास की शुरुआत होती है। खरमास को शुभ कार्यों के लिए वर्जित समय माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, यह अवधि 15 दिसंबर 2024 से शुरू होकर 14 जनवरी 2025 को समाप्त होगी, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस पूरे महीने में किसी भी शुभ कार्य को नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह समय ग्रह-स्थिति के कारण शुभता में बाधा डालता है।
खरमास में न करें ये कार्य
शादी-विवाह : खरमास के दौरान शादी या विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस समय विवाह करने से वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि की कमी हो सकती है।
सगाई और अन्य शुभ कार्य : इस दौरान सगाई, गृह प्रवेश, जनेऊ, मुंडन जैसे सभी शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, इस समय में किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं।
नया व्यापार या नौकरी : खरमास के दौरान नया व्यापार या नौकरी शुरू करना भी अशुभ माना गया है। इस समय नया कार्य शुरू करने से आर्थिक तंगी और व्यर्थ के कर्ज का सामना करना पड़ सकता है।
नया घर या वाहन खरीदना : नए घर की खरीदारी या गृह प्रवेश खरमास में वर्जित होता है। यह वास्तु दोष और सेहत से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी प्रकार, नया वाहन खरीदने से दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
तामसिक भोजन से बचें : इस समय तामसिक भोजन का सेवन अशुभ माना जाता है और यह स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।
खरमास में करें ये शुभ कार्य
पूजा-पाठ : इस समय पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व है। विष्णु भगवान की पूजा और सत्यनारायण कथा सुनने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
सूर्य को अर्घ्य देना : खरमास के दौरान सूर्य को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह ग्रह दोषों को दूर करने में मदद करता है।
ईश्वर की आराधना और उपवास : जप, तप, ध्यान और उपवास खरमास में शुभ माने जाते हैं। यह भविष्य के लिए लाभकारी होता है।
तुलसी पूजा : तुलसी को नियमित रूप से जल अर्पित करें और दीपक जलाएं। यह पूरे परिवार के लिए शुभ फल प्रदान करता है।
बृहस्पति की अनुकूलता : यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति धनु राशि में है, तो आप इस समय कुछ विशेष कार्य कर सकते हैं।
निष्कर्ष
खरमास को लेकर हिंदू धर्म में स्पष्ट नियम बताए गए हैं। इस अवधि में शुभ कार्यों से बचने और ईश्वर की आराधना करने पर जोर दिया जाता है। यह समय आत्मचिंतन और पूजा-पाठ के लिए उत्तम माना गया है, जो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।

